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आवडलेली कविता

ऐ इन्सानों कवि: गजानन माधव मुक्तिबोध आँधी के झूले पर झूलो आग बबूला बन कर फूलो कुरबानी करने को झूमो लाल सबेरे का मूँह चूमो ऐ इन्सानों ओस न चाटो अपने हाथों पर्वत काटो पथ की नदियाँ खींच निकालो जीवन पीकर प्यास बुझालो रोटी तुमको राम न देगा वेद तुम्हारा काम न देगा जो रोटी … Continue reading आवडलेली कविता

दीवार

बेड़िया भितर है, बाहर छटपटाहट है पाणी है और प्यास भी, अटपटाहट है ! ‘लोग क्या कहेंगे’ की जो एक दिवार है, तोड दे, तेरी खुशीया उसके ही पार है | रुपेश घागी (३० मई, २०१९) (Photo Credit: https://unsplash.com)

मुलाकात

मिल, खुल के मिल, फिक्र मत कर,मुलाकात का कहीं जिक्र मत कर,जो भी है दरमीयाँ, कोई नाम ना देदुनिया पे छोड, खुद इल्जाम ना दे ! – रुपेश घागी (२९ मई, २०१९) (Photo Credit: www.pixabay.com)

अंतर्मुख

जब कांच से ज्यादा आईना चुभता‌ है, जब शब्द से ज्यादा मायना चुभता‌ है, तब खामोशी से खुद को टटोलते है, खुद से मिलते है, और कम बोलते है ! रुपेश घागी (२८ मई, २०१९) (Photo Credit: www.pixabay.com)

बुद्ध…

शुन्य में नजर और मुखपर मुस्कान हैवह‌ अचल है, समय का इम्तिहान है,एक अवस्था, अस्वस्थता के पार की,अंतर्बाह्य शुन्यता के संपुर्ण स्विकार की ! – रुपेश घागी (२७ मई, २०१९) (Photo Credit: www.pixabay.com)

Quick Thoughts: Stupidity, Inequations, Unlearning

As moving up needs efforts and falling down is natural (all thanks to gravity), growing wisdom takes efforts and growing mindlessness is natural (all thanks to infinite human stupidity.) And there’s avalanche of headless statements, arguments and propaganda, all fueled by connectedness of new world. At last, having a working gadget is cheaper and easier … Continue reading Quick Thoughts: Stupidity, Inequations, Unlearning

चिडिया और चुरुगन

हरिवंश राय बच्चन यांची पालक म्हणून किंवा पाल्य म्हणून, वाचण्यासारखी व आनंद घेण्यासारखी अप्रतिम कविता.   छोड़ घोंसला बाहर आया‚ देखी डालें‚ देखे पात‚ और सुनी जो पत्ते हिलमिल‚ करते हैं आपस में बात; माँँ‚ क्या मुझको उड़ना आया? “नहीं चुरूगन‚ तू भरमाया” डाली से डाली पर पहँुचा‚ देखी कलियाँ‚ देखे फूल‚ ऊपर उठ कर … Continue reading चिडिया और चुरुगन

कशी वाढवावी मुलांची बुध्दिमत्ता?

दोघी सासवा – सुना, दोघी माय – लेकी, दोघी नंदा, भावजा, तीन वडे, वाटणी का पडे? अगदी एकदोन आठवड्यांपूर्वी आईने आम्हाला हे कोडं घातलं. मुलांचे संगोपन हा विषय सांगताना माझ्या आईचा एक विशेष प्रयत्न नेहमी आठवणीत असतो तो म्हणजे हा. Critical Thinking Ability वाढविण्याचा. तिला माझ्या शाळेचा अभ्यास नाही घेता यायचा, परंतु ते तिचं काम … Continue reading कशी वाढवावी मुलांची बुध्दिमत्ता?

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