बुद्ध…

शुन्य में नजर और मुखपर मुस्कान है
वह‌ अचल है, समय का इम्तिहान है,
एक अवस्था, अस्वस्थता के पार की,
अंतर्बाह्य शुन्यता के संपुर्ण स्विकार की !

– रुपेश घागी

(२७ मई, २०१९)

(Photo Credit: www.pixabay.com)

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