दीवार

बेड़िया भितर है, बाहर छटपटाहट है
पाणी है और प्यास भी, अटपटाहट है !
‘लोग क्या कहेंगे’ की जो एक दिवार है,
तोड दे, तेरी खुशीया उसके ही पार है |

  • रुपेश घागी

(३० मई, २०१९)

(Photo Credit: https://unsplash.com)

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